अनोखी दीपावली

नीता सेठ राधेनारायण की इकलौती बेटी थी। पिता ने बड़ी ही शानो- शौकत से एक राजकुमारी की भाँति अपनी पुत्री को बड़ा किया। नीता फूलों- सा कोमल जीवन जीने की अभयस्त थी, कांटों रूपी दुःख क्या होता है उसे इसका जरा भी अनुमान नही था। क्योंकि पिता राधेनारायण मांगने से पहले ही उसकी सारी आवश्यकताओं की पूर्ति कर देते थे। बचपन से ही अमीरी में पलने वाली नीता मध्यमवर्गीय लोगों को हीन भावना से देखने लगी। उसकी दृष्टि में ऐसे लोग आदर व सम्मान के लायक नही थे।
समय बदलता गया। पढ़ी- लिखी नीता अब बड़ी होकर मल्टी नेशनल कंपनी में कार्य करने लगी। यही पर कार्यरत सादगी युक्त परन्तु बुद्धिमान नवयुवक आरव से उसे प्रेम का आभास होने लगा। आरव गरीब परिवार का तीन भाइयों में सबसे छोटा था।
ईमानदारी से कार्य करने से कंपनी के मालिक ने उसे मैनेजर का पद दिया और उसका वेतन भी बढ़ा दिया।
नीता ने अपने मन की बात अपने पिता को बताई पर उनको ये रिश्ता मंजूर नहीं था, वो नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी अपने से कम हैसियत वाले व्यक्ति से विवाह करें।
परंतु बेटी की जिद के आगे पिता को हार माननी पड़ी।
नई नवेली दुल्हन बनकर नीता एक सीधे-सादे परिवार की सदस्य बन गई।
उसके विचार आरव के परिवारजनों से भिन्न थे, वह हर बात पर उन्हें नीचा दिखाती। दीपावली आने वाली थी तो घर की सफाई के दौरान पैर फिसलने से उसके सिर और कमर पर गम्भीर चोट आ गई। नीता गुस्से में भर उठी और लहूलुहान हालत में भी वह उन पर दोषारोपण करने लगी। उसकी ऐसी दशा देखकर आरव और उसके भाई तुरंत उसे अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टर ने दवाइयों के साथ 2 महीनें आराम करने की सलाह दी। अस्पताल से आने के बाद तो जैसे सबके एक ही काम था सिर्फ नीता की देखभाल करना। वो उसे एक पल भी अकेला नहीं छोड़ते। दिन- रात बस उसके ठीक होने की प्रार्थना करते। उनके निश्चल प्रेम को देखकर नीता भाव विभोर हो गई। उसे अपनी गलती और अहंकार पर पछतावा होने होने लगा।
उनके सेवा रूपी फल से वह जल्दी ही स्वस्थ हो गई। आज दिवाली थी, घर की लक्ष्मी के सच्चे कदम घर में पड़ चुके थे। अपनों के स्नेह को नीता समझ गई थी। अब वह एक सुशील और जिम्मेदार बहु थी। दीपावली की रोशनी आज उसके जीवन से भेदभाव का अंधकार मिटा गई। उसका हृदय दीपों की जगमगाहट की तरह प्रेम और समर्पण से भर गया।

~जमुना “धनराज”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!