चलो सखी चलो हमारी दिवाली को,
कुछ उद्देश्य पूर्ण और अलग बनाएँ।
हर गरीब के घर को भी रोशनी दे जाएँ।।
चलो सखी चलो दिवाली पर,
कुछ महत्वपूर्ण कार्य निपटाऍं।
प्रकृति को स्वच्छ कर दीप पर्व मनाएँ।।
चलो सखी चलो इस दिवाली को,
कुछ सौहार्द पूर्ण और सफल बनाएँ।
अनाथ बच्चों के चेहरे पे मुस्कान खिलाएँ।।
चलो सखी चलो यह दिवाली पर,
कुछ महत्वपूर्ण स्मृतियाँ सजाएँ।
मात-पिता को सुख पहुँचाकर जीवन सफल बनाएँ।।
चलो सखी चलो अबकी दिवाली को,
कुछ रंगीन यादों के रंगों से सजाएँ।
दोस्तों संग मिल-बांटकर यह पर्व मनाएँ।।
चलो सखी चलो यहां दिवाली पर,
कुछ मिठाई अनाथों को दी जाएँ।
उनके जीवन में खुशियों की मिठास भर जाएँ।।
स्वरचित
- डॉ. ज्ञानेश्वरी व्यास (स्मृति)
