आते हैं त्यौहार जब, खुश होते नर-नार।
आएगी दीपावली, जग-मग होगा द्वार।।
दीपोत्सव आगाज है, धूम मची ये आज।
खूब पटाखे चल रहे, होती है आवाज।।
रंगोली से भी सजे, आँगन अरु घरबार।
आएगी दीपावली, जग-मग होगा द्वार।।
पाँच दिवस त्यौहार है, पूजा करते लोग।
धन्वंतरि भी पूजते, धनतेरस का योग।।
औषधियों का ज्ञान रख, स्वस्थ रहे संसार।
आएगी दीपावली, जग-मग होगा द्वार।।
चतुर्दशी है रूप की, खूब करें शृंगार।
गहने सोहे देह पर, पहन नौलखा हार।।
मावस लक्ष्मी पूजते, लक्ष्य अर्थ भंडार।
आएगी दीपावली, जग-मग होगा द्वार।।
मिला मातु आशीष तो, दूर हुए हैं रोग।
सजते घर आँगन सभी, लगते छप्पन भोग।।
पद्मा जी का आगमन, करतीं नैया पार।
आएगी दीपावली, जग-मग होगा द्वार।।
कमलेश गर्ग आर्या ‘नलिन’
