जब कार्तिक की शाम ढलती है,
जब मिट्टी की खुशबू हवा में घुलती है,
तब भारत का हर बच्चा कहता है —
आ गई, हमारी अनोखी दिवाली आ गई।
पर इस बार हम पटाखों से नहीं,
हम दिलों से दिवाली मनाएंगे।
- गरीब के लिए
उस घर में भी दीया जलेगा,
जहाँ छत नहीं, हौसला है।
जहाँ रोटी कम है, पर
मेहमान को खिलाने का दिल बड़ा है।
हम एक मुट्ठी चावल नहीं,
एक मन भर प्यार ले जाएंगे। - अनाथ के लिए
जिसका कोई नाम नहीं,
आज से वो हमारा भाई है।
जिसका कोई घर नहीं,
आज से पूरा भारत उसका घर है।
उसके माथे पर भी तिलक लगेगा,
उसके हाथ में भी मिठाई होगी। - रोगी के लिए
जो बिस्तर पर पड़ा है,
जो दर्द से लड़ रहा है,
उसके लिए हम दुआ का
और आशा का दीया जलाएंगे।
कहेंगे — घबराना मत,
पूरा भारत तेरे साथ खड़ा है। - वृद्ध के लिए
वो दादा, वो दादी,
जिनके बेटे परदेस में हैं।
आज हम उनके पैर छुएंगे,
उनके पास बैठेंगे,
उनकी कहानियों में फिर से
बचपन ढूंढेंगे। - किशोर के लिए
जो 10वीं में है, जो 12वीं में है,
जो सोचता है — मेरा क्या होगा?
उससे कहेंगे —
तू भारत का चिराग है,
तेरी मेहनत ही तेरी दिवाली है। - बेटियों के लिए
और अंत में हमारी बेटियाँ —
जो सुबह उठकर घर संभालती हैं,
स्कूल जाती हैं, सपना सजाती हैं।
ये लक्ष्मी नहीं, ये पूरी सृष्टि हैं।
इनके बिना आंगन सूना है,
इनके बिना दिवाली अधूरी है।
तो आओ,
इस दिवाली हम शपथ लेते हैं —
ना कोई गरीब भूखा सोएगा,
ना कोई अनाथ अकेला रोएगा,
ना कोई रोगी हिम्मत हारेगा,
ना कोई वृद्ध दरवाज़ा ताकेगा,
ना कोई किशोर सपना छोड़ेगा,
ना कोई बेटी डर से छिपेगी।
जब हर दिल में अनोखा दीया जलेगा,
तभी तो हर घर खुशियों के उजालों से चमकेगा,
तभी तो भारत का हर घर मुस्कुराएगा।
शुभ दीपावली — अनोखी रोशनी आपके मन की, खुशी व उल्लास सबके सबकी घर की।
श्रीमती सरिता नायक “सरि”
*शिक्षिका एवं कवियत्री
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला- गड़ाकटा
विकास खण्ड-कुनकुरी जिला -जशपुर छत्तीसगढ़ –&&&&-&&-&&&&–
