आया दीपावली का पावन, पर्व बड़ा सुखकारी है।
चमक उठी हर एक अटरिया, खुशियों की फुलवारी है॥
तम का सारा भेद मिटाने, ज्योति लिए हम आए हैं।
घर-घर दीप जलाकर प्यारे, खुशियाँ खूब मनाएँगे॥
स्वर्ण कलश और फूल सजे हैं, द्वारों पर बंदनवारे।
महालक्ष्मी के चरणों में, शीश झुकाते सब प्यारे॥
खील बताशे भोग चढ़ाकर, मंगल गान सुनाएंगे।
पावन बेला आज मिलजुल, सब ही दीप जलाएँगे॥
छूट रहीं फुलझड़ियाँ नभ में, तारे जैसे शर्माते।
बच्चे बूढ़े और युवा सब, मिलकर खुशियाँ मनाते॥
अयोध्या धाम सजे अनुरागा, रामचन्द्र घर आए हैं।
पावन महिमा आज जगत् में, सबके मन को भाए है॥
भेद-भाव के बंधन सारे, आज प्रेम से तोड़ेंगे।
सबको अपना गले लगाकर, नए रिश्ते जोड़ेंगे॥
हर आँगन में दीप जले तो, मन का अंधियारा भागे।
सुख-समृद्धि की नदियाँ बह लें, जीवन के सब दुःख भागे॥
रोशन हो हर एक दिशा ही, गूँजे मंगल गान यहाँ।
सबके मन में प्रीत जगे तो, बस जाएँ भगवान यहाँ॥
दीपावली का पावन संदेशा, घर-घर अलख जगाए है।
सुख और शांति का उजियारा, सबको ही अपनाए है॥
डॉ.आनंदकृष्णन एडचेरी
कासरगोड़ जिला , केरल
