✍🏻 राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि”पत्रकार
दीपावली सिर्फ दीपों का नहीं,
अंतस के उजास का पर्व है,
बाहर की रोशनी से ज्यादा,
भीतर के प्रकाश का पर्व है।
एक दीप ऐसा जलाएं,
जो अहंकार को जलाए,
ईर्ष्या, द्वेष, अंधकार मिटाए,
और प्रेम का उजियारा फैलाए।
दीपोत्सव आया है द्वार,
खुशियों की लेकर बहार,
चलो गरीबों के साथ मनाएं,
उनके घर भी दीप जलाएं।
फेस्टिवल ऑफ लाइट्स नहीं,
ये संस्कारों की रोशनी है।
आओ इस दीवाली पर प्रण लें
अपने अर्थ का उपयोग परमार्थ में करें,
भारत मां की पुण्य धरा से यही संदेश दें,
हर दिल में एक दीप प्यार का धरें।
प्रस्तुति
राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार, कोटा (राज) 9414764980
