प्रकाश का पर्व-दीपावली

कार्तिक मास की अमावस सच में उजियारा लाई ,
देखो राम जी आये जगमगाती दीपावली आई।

सब कुछ भूल सबने मिलकर रोशनी फैलाई,
हर घर गली कूचे बाजारों में खुशियॉं छाई।।

धर्म जाति ऊॅंच-नीच दुख दुश्मनी मतभेद से ऊपर उठकर ,
घर परिवार समाज से मिले संस्कारों के साथ चलकर।

नई उमंग नई तरंग नया जोश नई चेतना जगाई ,
सब ने मिलजुल कर दिल से दिवाली मनाई।।

गणेश लक्ष्मी कुबेर जी की घर-घर में पूजा होती,
बुराई पर अच्छाई की जीत अंधकार में रोशनी होती।

प्रसाद पटाखे मिठाई रंग बिरंगी टिमटिमाती लडिया होती,
माटी से बन गए दीपक कपास से बनी बाती होती।।

घर को सबसे सुंदर सजाते ऑंखों में सुख की आस जगाते,
तन मन धन से सब कुछ अर्पण करके घर-घर मीठा प्रसाद पहुॅंचाते।

हाथ जोड़ अंतर मन से खुशियों की कामना करते,
हर दिवाली सुख समृद्धि वैभव मिले प्रभु से प्रार्थना करते।।

डॉ०दीपक कुमार “भोला जी”
शिक्षक कवि व लेखक प्रधानाध्यापक
संविलियन विद्यालय तरारा हाजीपुरा
विकास क्षेत्र …हसनपुर जिला…अमरोहा
राज्य….उत्तर प्रदेश
पिन कोड 244235

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