जगमग जगमग दीप जल उठे,महक उठा आज जहांन,
खुशियों की सौगातें लेकर, आया दीपों का कीर्तिमान।
सोने जैसी चमक रही है,आज धरा की पावन गोद,
चारों ओर विखरा है देखो, सुख-समृद्धि का पावन मोद ।
मिट्टी के इन छोटे दीयों में,छिपी है अदभुत आस,
दूर करेंगे घोर अंधेरा,मन में भरकर नया विश्वास।
लक्ष्मी मां का आशीष बरसे, घर-घर में हो सुख का बास।
मिट जाये जीवन की चिन्ता, फैलें चारों ओर प्रकाश।
चलो मिलकर ‘ब्रज’ हाथ बढ़ाए,जग को फिर से स्वर्ग बनाएं,
इस पावन शुभ दीपावली पर, दीपों का उत्सव मनाएं।
ब्रजेश कुमार सिंह ‘ब्रज’
