दीपक सा जलते रहना तुम, रौशन तो जग को करना है।
संयम धारण ज्ञान सिखा यह, अंतस के तम से लड़ना है।।
सुंदर जीवन राह खिले तब, संबल ताकत को भरना है।
मुश्किल बाधक है बनती पर, दंगल में तुमको तपना है।।
हे नर दीपक सा बनना तुम, द्वेष मिटा निज से लड़ना है।
अर्पित जीवन भाव रखो बस, देश लिए अब तो जलना है।।
सुंदर भारत गान करें हम, तो इस पे हमको मरना है ।
क्यों डरना सुन वीर बनो अब, दीपक ही सम तो तपना है।।
प्रीत रहे जग कर्म करो नर, प्रेम रहे मन दीप जलाओ।
शीतल मंद बयार बहे तब, बंधन मुक्त समाज बनाओ।।
है महिमा इसकी अति पावन, दूषित भाव विकार दबाओ।
सेवक ही बनके रहना बस, दीपक के पथ पैर बढ़ाओ।।
निलम अग्रवाल दीक्षिता’
