दीपावली है ऐसा त्यौहार

भारत में दीपावली , है ऐसा त्यौहार।
मनती कार्तिक की अमा , की निशि में हर बार।।01

सजते हैं घर – द्वार भी , और सजें बाजार।
अंधकार भी घूमता , कर उजला श्रृंगार।।02

साफ – सफाई कर सभी , चमकाते घर – द्वार।
रंग – बिरंगी झालरें , सजते बंदनवार।।03

दीप जलें हर देहरी , हो जगमग संसार।
ज्ञान – ज्योति मन से करे , जड़ता का निस्तार।।04

जलते दीपों से भगे , मन भीतर के शोक।
अंधकार को दूर कर , फैलायें आलोक।।05

धन – रूपी कमलासना , ज्ञानी – रूप गणेश।
कमी रहे कुछ भी नहीं , जिस घर करें प्रवेश।।06

लाती है दीपावली , हर्ष और उल्लास।
साफ – सफाई पर रहे , सबका ही विश्वास।।07

अवधपुरी में थे जले , दीप इसी दिन खास।
जब लौटे श्री राम जी , पूरा कर वनवास।।08

  • कैप्टन जगदीश चन्द्र पाण्डेय ‘जगदीश’
    (उत्तराखंड)

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