दीपों का त्योहार ,दिवाली खुशियाँ लाई।
चमके सब घर द्वार,बनी छवि अति सुख दाई।।
मिलकर सब परिवार, घरों को बहुत सजाते।
पहनें नव पोशाक,साथ मिल पर्व मनाते।।
गुंजा मोहन थाल,बनीं भरपूर मिठाई।
मठरी औ नमकीन,थाल भर खूब सजाई।।
पूजन लक्ष्मी मातु,साथ परिवार सुहाया।
सज्जित दीप कतार, पटाखे बचपन लाया।।
ठाकुर के दरबार,दीप सब अर्पित करते।
लगता उत्तम भोग,भेंट सह श्रीफल धरते।।
श्रद्धा सहित प्रणाम, बङों को शीश नवायें।
छोटों को कर प्यार , स्नेह से गले लगायें।।
बसें पास जो दीन,ख्याल उनका भी रखना।
यथा -शक्ति सहयोग,खुशी से झोली भरना।।
बढता है सुख सार,पर्व जब साथ
भेदभाव से दूर,प्रेम का हाथ बढाते।।
पुष्पा शर्मा’कुसुम ‘
