अंधियारे को चीरकर, फिर आई दीपावली,
हर आँगन में रोशनी की सौगात लाई दीपावली।
दीपों की जगमग से, धरती मुस्कुराती है,
रंगोली के रंगों से, हर राह सज जाती है।
आसमान में चमकते, तारों से प्यारे दीप,
मन में जगा देते हैं, आशाओं के नए समीप।
मिठाइयों की खुशबू से, महक उठे संसार,
अपनों के संग खिल उठे, खुशियों के त्योहार।
न कोई मन में बैर रहे, न कोई हो उदास,
प्रेम और सद्भाव से, जग में फैले प्रकाश।
लक्ष्मी के चरणों से, घर-आँगन धन्य हो,
हर चेहरे पर मुस्कान, हर जीवन में पुण्य हो।
मिट जाए हर द्वेष यहाँ, मिट जाए हर विकार,
सत्य और सदाचार से, रोशन हो संसार।
दीप जलें विश्वास के, दीप जलें सम्मान के,
दीपावली संदेश बने, मानवता और प्रेम का ।
लेखक – सिद्धार्थ मिश्रा
सम्बलपुर
