दीवाली त्योहार

भारत की धरती में है जो, सुख वैभव का शुभ आधार।
सबका जीवन उज्ज्वल करता, दीवाली पावन त्योहार।।१।।

राम अयोध्या में जब आएं, धर्म धरा फैला आकाश ।
रात अमावस दीप जलाकर,
ज्ञान सार के पंथ प्रकाश ।।२।।

अधर्म महि पर धर्मित धारा, दीवाली से होत प्रवेश ।
ज्यों उज्ज्वल किरणों में भू हो, रौशन दिखते सदा गणेश ।।३।।

चौदह वर्षी वनवासी मम, राम अयोध्या के अभिमान ।
उनकी खातिर जन गण मन भी, करते रहते हैं बलिदान ।।४।।

लक्ष्मी गणपति पूजन अर्चन, दीप यज्ञ में दीप हि दान ।
दीपावली सु पावन अवसर, भरत संस्कृति रखना मान ।।५।।

कई-कई गाथा जुड़े हुए, है इस पावन अवसर के नाम ।
पाँच दिनों तक चले दिवाली, संस्कृति रक्षा का है काम ।।६।।

ईर्ष्या द्वेश मिटा जगती से, करुणा ममता का विस्तार ।
ऐसे पावन पर्व धरा पर, रक्षित रखता है परिवार ।।७।।

आशा दीपक लेकर चलना, देना विश्व गुरू संदेश ।
व्योम जगत में दीप पर्व पर, नई राह दे पुण्य महेश ।।८।।

🌹 प्रतिभा प्रसाद ‘कुमकुम’
दिनांक –3.11.26..

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