शुभ दीपावली

१-
सजे हुए घर द्वार, सजी है गलियांँ सारी।
आंँगन दीप कतार, लगे है शोभा न्यारी।।
स्वच्छ किया घर बार, सफाई सब कर डाली।
रंगोली है द्वार, मनायें खूब दिवाली।।
२-
खील बताशे और, मिठाई सब घर लायें।
छोड़े सभी अनार, पटाखे खूब जलायें।।
छाया है आनंद, मगन मन मोद हमारे।
देख हुआ मन क्षुब्द, दूर फैले अंँधियारे।
३-
मन है बहुत उदास, रंग जीवन के खोये।
दिखते सूने नैन, आज आंँसू से धोये।।
तम का है साम्राज्य, निराशा का है डेरा।
छिपा हुआ सुख सूर्य, आस का नहीं बसेरा।।
४-
दीपक लेकर हाथ, चलें हम उनके द्वारे।
खुशियांँ लौटे आज, करें घर- घर उजियारे।।
आँसू उनके पौछ, प्रेम से गले लगायें।
चमक दिखे फिर नैन, अधर सबके मुस्कायें।।
५-
दीपों का त्यौहार, मनायें मिल- जुल सारे।
बाहर भी उजियार, हृदय भी ज्ञान उजारे।
है पावन त्यौहार, जगे मन भाई चारा।
जले दीप से दीप, बहे सद्भाव की धारा।।

उषा उमेश गुप्ता ‘उमा’बेंगलुरु

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