बीती ऋतु वर्षा शरद है आई,
खिल गया जग मोहकता छाई l
नवरात्र मे पूजा की धूम मचे,
आई दिवाली जगमग दीप जले l
खेतों मे धान है पीला,
सुहानी धरती अम्बर दिखता नीला l
धुँध की छँटा छा जाती है,
सबके मन को हर्षाती है l
बच्चे, बूढ़े, जवान, सबके हाथों मे,
फुलझड़ियां चरचराती हैं l
सारे गम दूर हो जाते हैं,
कतारें दीपों की झिलमिलाती हैंl
फोड़े पटाखें जात- धर्म, नफरतों के,
मानवता के दीप जला कर l
आओ सुखद सृष्टि बनाने,
बाहें फैला, सबको गले लगा कर l
हमें सुख शांति देने वाले,
उन वीरों को भी याद करें l
उनके त्याग और बलिवेदी पर,
हम श्रद्धा से अपना मस्तक धरें l
दीप ज्ञान का जलेगा,
जीवन से अँधियारा भागेगा l
आलोकित पथ होगा सबका,
जीवन उपवन महकेगा l
🙏🙏🙏🙏🙏
राकेश कुमार
सबेयाखुर्द, प. चम्पारण
(बिहार)
