आओ खुशियों के दीप जलाएं, अंधेरे को मिटाएं।
देखो आई दीवाली।
जगमग जलते दीपों से मिटे , ये रात अमावस वाली।
देखो आई दीवाली।
धनतेरस से शुरू पर्व यह, खुशियां दे जाए हर एक को।
सुख समृद्धि आए, पूरे हो सपने जो अनेक हों।
वाणी से स्नेह सुधा छलकाए,ऐसी हो पूजा की थाली।
देखो आई दीवाली…!
जगमग जलते दीपों से मिटे , ये रात अमावस वाली।
देखो आई दीवाली।
अपना समाज ऐसा,पिछड़ा है अशिक्षा के विकार से।
उनको हम प्रेरित करें, उन्नत बनाएं हर प्रकार से।
उनको हम शिक्षित,सबल बनाएं, हरें अज्ञान की कालिख काली।
देखो आई दीवाली….
जगमग जलते दीपों से मिटे , ये रात अमावस वाली।
देखो आई दीवाली।
दीवाली होगी सबकी रोशन, जब उम्मीदों के दीप जगमगाएंगे।
आशाओं के दिए जलेंगे , जब खुशियों को बाटेंगे, बटाएँगे।
लक्ष्मी गणेश की पूजा यही है, सबके घर में हो खुशहाली।
देखो आई दीवाली….।
जगमग जलते दीपों से मिटे , ये रात अमावस वाली।
देखो आई दीवाली।
भैयादूज स्नेह उत्सव है भाई बहन के अनुपम प्यार को।
करके गोवर्धन पूजा,सीखें कान्हा के शिक्षा व्यवहार को।
जिम्मेदारी के पर्वत से बोझ को, हंसकर के उठाते गिरधारी।
देखो आई दीवाली….।
जगमग जलते दीपों से मिटे , ये रात अमावस वाली।
देखो आई दीवाली।
….✍🏾 बृजमोहन पाल ।
ग्राम ककरही खुर्द पोस्ट सदलपुरा जनपद चंदौली,उत्तर प्रदेश।
