दीप सोच की

चलो जलाते हैं एक दीप,
उस सहजता के नाम पर,
देखकर मुझे कोई लड़की
डरेगी नहीं ,सहज होगी मुझसे।
खुलकर कह सकेगी बात ,
नहीं करना होगा आंदोलन
उसे आत्मरक्षा के नाम पर।
चलो जलाते हैं एक दीप,
सहजता के नाम पर।

अगर दे नहीं पाए कभी
स्त्रियों को सम्मान,
तो कोई हक नहीं है मुझे
दीपावली के दीप जलाने का।
आए थे राम अयोध्या इसी दिन,
सीता की अस्मिता साथ लेकर।
चलो जलाएं दीप,
उसी सीता की अस्मिता बचाने के लिए।

      अकिंचन रायबरेलवी
       रायबरेली, उत्तर प्रदेश।   

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