सुखदेव शर्मा एडवोकेट कवि जिला बदायूं / संस्कार न्यूज़
शरद ऋतु कार्तिक मास अमावस की ठंडी रात काली।
अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाती दिवाली।।
युगों युगों से मिट्टी के दीप में घी तेल वाती जला के मनाते दीवाली।
घरों मंदिरों द्वारों बाजारों में दीपमालिका की श्रृंखला निकाली।।
राम रावण को मारकर चौदह वर्ष बाद आये अयोध्या धाम संग लक्ष्मण सीता निराली।
उनके स्वागत हेतु संपूर्ण अयोध्या में दीप जलाकर रोशन किया मनाई दिवाली ।।
मां लक्ष्मी गणेश सरस्वती कुबेर की पूजा करने की चौकी लगाली।
अक्षत से अष्टदल कलश गंगाजल दूर्वा पंचरत्न आम के नारियल से थाली सजाली।।
पांडव अज्ञात वास से वापस आये ,नरसिंह रूप धर हिरण्यकश्यप को मार डाली।
समुद्र मंथन से लक्ष्मी धन्वंतरि प्रकट हुए विष्णु को पति रूप में चुनने वाली।।
नरकासुर का वध श्रीकृष्ण ने किया, महावीर स्वामी ने मोक्ष धाम पाली।
अमृतसर में स्वर्ण मंदिर का हुआ शिलान्यास हर गोविंद सिंह ने जेल से रिहाई ली।।
पंजाब में जन्मे स्वामी राम तीर्थ का हुआ जन्म महाप्रयाण थी दीवाली।
दीन ए इलाही के प्रवर्तक मुगल सम्राट अकबर ने चालीस गज ऊंचे बांस पर आकाश दीप जला मनाई दिवाली।।
धनतेरस नरक चतुर्दशी गोवर्धन पूजा भाई दूज पंचपर्व संग दिवाली।
खरीफ की फसल पककर तैयार कृषकों की समृद्धि करती दिवाली।।
पटाखे आतिशबाजी छुरछुरियां जलाकर खेल खिलौने खाकर मनाते दीवाली।
दीपावली के दिव्य प्रकाश से जीवन में फैले सुख शांति समृद्धि खुशियां उल्लास वाली।।
पर्यावरण प्रदूषण मुक्त हो हर दिवाली।
रागिनी दीपक राग गाओ , घर व दिल से गंदगी निकाल मनाई दिवाली।।
