बिजली की झालर से मत घर सजाना
दीपावली है दीये ही जलाना
माटी के दीपक जो है बनाता
मुश्किल से है वो घर को चलाता
अक्सर पड़े यूँही रह जाते वो
सारे कभी भी नहीं बेच पाता
इस बार थोड़े से तुम भी ले आना
दीपावली है दीये ही जलाना
उसका भी परिवार मिष्ठान्न खाए
नए वस्त्र पहने खुशियां मनाए
वो भी मना ले घर में दिवाली
उसके भी बच्चे पटाखे चलाएँ
उसकी दिवाली को रोशन बनाना
दीपावली है दीये ही जलाना
तुमको बहुत सी दुआएँ मिलेंगी
माँ लक्ष्मी तुमको वरदान देंगी
किसी की खुशी का जो कारण बनो तुम
खुशियाँ तुम्हारे भी घर बरसेंगी
किसी झोंपड़ी का अंधेरा मिटाना
दीपावली है दीये ही जलाना
सरिता विजय शर्मा, गाजियाबाद
