दीपावली एक दीप देहरी पर, एक दीप अंतःकरण में… दीप जलाना सरल बहुत है,पर स्वयं दीप बनना कठिन है,घर का तम तो मिट जाता है,मन का तम मिटना कठिन है।…
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रंग बरसे गो
रंग बरसे कछु इमरत बरसे,से कछु इमरत बरसे, बरस रही कस्तूरी रंग बरसे गो।। हरयो-हरयो गोबर से अंगना लिपायेंगे, पीली-पीली मिट्टी मिलायेंगे। रंग बरसे गो… छोटे-छोटे दीपक घर जोड़ेंगे, खूब ही खुशियां बांटेंगे। नये-नये पकवान बनाएंगे, और मिठाई बनाएंगे। रंग बरसे गो… नये-नये कपड़े पहिनेंगे, और लक्ष्मी पूजन करेंगे। लक्ष्मी मां को आसन पे बिठायेंगे, और चुनरी उढ़ायेंगे। रंग बरसे गो… लक्ष्मी मां को घर पर बुलायेंगे, और स्वागत करेंगे। लक्ष्मी मां कृपा बरसायेगी, और आत्म दर्शन करेंगे। रंग बरसे गो… रंग बरसे कछु इमरत बरसे, बरस रही कस्तूरी रंग बरसे गो। तीनू ही रंग बरोबर बरसे, लाल, हरयो रंग पीलो रंग बरसे गो।। महिला अधिकारिता विभाग की साथिन सुगन देवी ग्राम पंचायत बबेली, पंचायत समिति रैणी, जिला अलवर (राजस्थान)। 🙏🏻🙏🏻
हृदय-दीप
सहस्रार के नील-गगन में राम, धवल आदर्श-सा, मूलाधार की श्याम-धरा पर सीता, मौन-उत्कर्ष-सा! बीच हृदय का अनाहत स्वर, बिना जला, बिना बुझा, अग्नि-परीक्षा नहीं, प्रेम-सेतु था अनसुझा! सीता ज्वाला नहीं, ज्वाला की आद्य-शिखा, स्वयं-प्रभा, रावण-कर ने छुआ छाया को, छू सका न प्रभा! अग्नि से कहाँ निकलना था उसे, जो अग्नि-स्वरूपा थी, राम को आना था हृदय तक, मर्यादा से ऊपर उठी! पर राम रहे सहस्रार में ही, लोक-लाज के शास्त्र में, सीता लौटी धरा-गर्भ में, मौन-व्यथा के पात्र में! आज दीपावली फिर आई, जगमग अयोध्या-द्वार है, पर हृदय के निभृत-आले में एक दीप अभी उदास है! जला सको तो इस बार तुम अनाहत में एक दीप जला दो, सहस्रार से मूलाधार तक हृदय का सेतु बना दो! तभी दीपावली सार्थक होगी, तभी राम घर आएंगे, धरा-गगन के बीच हृदय में जब दोनों मुस्कुराएंगे! नाम : संगीता जड़िया पद : सृजन सारथी / संस्कार न्यूज़ शहर : अजमेर मोबाइल नंबर:9414006311
दीपों का त्योहार
दीपों का त्योहार ,दिवाली खुशियाँ लाई। चमके सब घर द्वार,बनी छवि अति सुख दाई।। मिलकर सब परिवार, घरों को बहुत सजाते। पहनें नव पोशाक,साथ मिल पर्व मनाते।। गुंजा मोहन थाल,बनीं भरपूर मिठाई। मठरी औ नमकीन,थाल भर खूब सजाई।। पूजन लक्ष्मी मातु,साथ परिवार सुहाया। सज्जित दीप कतार, पटाखे बचपन लाया।। ठाकुर के दरबार,दीप सब अर्पित करते। लगता उत्तम भोग,भेंट सह श्रीफल धरते।। श्रद्धा सहित प्रणाम, बङों को शीश नवायें। छोटों को कर प्यार , स्नेह से गले लगायें।। बसें पास जो दीन,ख्याल उनका भी रखना। यथा -शक्ति सहयोग,खुशी से झोली भरना।। बढता है सुख सार,पर्व जब साथ भेदभाव से दूर,प्रेम का हाथ बढाते।। पुष्पा शर्मा’कुसुम ‘
