नित्याकला एस नायर
दीपों का उजाला लेकर दीवाली आई,
तम के आँगन में आशा मुस्काई।
झिलमिल-झिलमिल दीपों की माला सजी
जैसे नभ में तारों की बारात सजी।
रंग-बिरंगे रंगोली, द्वार सजे हैं,
कुमकुम-रोली से थाल भरे हैं।
घर-घर में लक्ष्मी के चरण पड़े हैं,
खुशियों के मोती हर ओर जड़े हैं।
अंधकार पर प्रकाश की जीत हुई,
बुराई पर अच्छाई की जीत हुई।
मन के भीतर का भय दूर हुआ,
हर दिल में प्रेम का दीप जल उठा।
मनुज को क्या मिलता है इस त्योहार से?
मनुज को मिलता है प्रेम व्यवहार से।
मिलती है एकता, मिलता है ज्ञान,
मिटता है बैर, बढ़ता है सम्मान।
मिलता है हमें अंधेरे से उजियारा,
छोटे-बड़ों से मिलता है दुलारा।
दीयों सा जलना, दीयों सा बाँटना प्रकाश,
यही सिखाती है दीवाली, यही है सच्चा उल्लास।
आओ सब मिलकर दीप जलायें,
नफरत को छोड़, गले मिल जायें।
यही दीवाली का सच्चा सार है,
मानवता से बड़ा कोई त्योहार नहीं, यही प्यार है।
