कार्तिक माह के मध्य मे , दीपावली त्यौहार |
रंग रोगन घर- घर करै. ज्योति जरै हर द्वार ||
दीवाली के दिन बसे, काली अमावस के रात |
जगमग ज्योती प्रीयती, करि किरपा के बरसात ||
हरी भरी वसुन्धरा , लहराती अन्नपूर्णा |
हेमंत ऋतु कनकाम्बरा, तिमिरनिशा दीपाम्बरा ||
श्री लछ्मी धन दायिनी, जगपालक जगदंब |
सिन्धू सूता गजवाहिनी , आऔ माता अविलंब ||
सबके बसे भंडार मे, बिन तैरे सब रंक |
भूमी, पदवी, वाहन , विजय , बसे श्री विष्णू कै अंक ||
कमला माता महाविद्या , वैष्णवी कमलासना |
देवी पद्मा अन्नपूर्णा , कमलहस्ते कमलानना ||
शंखं चक्रं गदा पद्मं , धारणीम् चतुर्भूजं |
रक्ताम्बरा प्रसन्नमुद्रं, देहि सुखं च ऊर्जंम् ||
आरती पूजा दीप मंडली , श्री फल कदली भोग |
पान सुपाणी मै खुस होकर, शुभ करती संयोग ||
प्रो. हिरन दास महार
