यु तो भारत मे सबसे ज्यादा त्योहार का देश अमृतसर है , यहा वक्त वक्त पर हजारो त्योहार मनाये जाते है । लेकिन सबसे प्रमुख त्योहार दीपावली का है , जो पुरे भारत देश मे मनाया जाता है । यह दीये का त्योहार है । मान्यता है कि इस दिन भगवान राम चौदह वर्ष का बनवास काटकर अयोध्या वापिस आये थे , तब इस खुशी के मौके पर पुरे राज्य को दुल्हन की तरह सजाया गया था ,ओर धी के दीप जलाए गये थे , तब से हर साल हर देश मे दीपावली का त्योहार मनाया जाता है ।
लोग अपने अपने धर की सफाई करते है ओर तरह तरह से अपने धरो को बिजली की लाइट्स से सजाते है,ओर खुद भी इस दिन नये वस्त्र पहनकर अपने भाई-बहन के धर त्योहार बाँटने जाते है , इस दिन सबके चेहरे पर खुशी ही अलग तरह की होती है , इस दिन वैर भाव भुलाकर दुश्मन को भी गले से लगाया जाता है । बाजार से लक्ष्मी _ गणेश हाथी ,धोडे पताशा ,मरू नडे , मिठाई, बर्तन नये बाजार से लाये जाते है , इस दिन बाज़ार की रोनक देखने वाली होती है ।
अमृतसर मे दरबार साहिब की दीपावली दुर दुर तक मशहूर है , लोग दुर दुर से यहा दीपावली देखने आते है , इस दिन दरबार साहिब मे पाव रखने की भी जगह नही मिलती , रात तक लोग गिफ्ट बाँटने मे लगे रहते है ।
फिर रात को मन्दिर मे लक्ष्मी माता ओर गणेश जी का पूजन किया जाता है , दुध की कटोरी मे चांदी का सिक्का डालकर कपूर का दीपक जलाया जाता है , कई तरह के फल _फूल , मेवा , मिठाई से भोग लगाया जाता है ।सब मे मिलकर प्रसाद बांटकर खाया जाता है ।
फिर बाहर खुले मे जाकर या छत पर दीपमाला की जाती है ,तरह तरह के पताको से आसमान की छटा देखने वाली होती है , छोटे बड़े सब तरह के पटाखे चलाये जाते है , कही फुल झडी ,कही अनार कही एटम बम बेशुमार , रात भर पटाखे के शोर से पुरी धरती तो क्या ,आसमान भी गुजतां रहता है ,
लेकिन हमे पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधीन वायुमंडल प्रभावित हुए बिना नही रहता , इसलिए हमे हल्के फुल्के पटाखे चलाने की सलाह दी जाती है ।
मै आस्ट्रेलिया से कई बार स्पेशल अमृतसर दरबार साहिब की दीपावली देखने जाती हु, इसबार भी मुझे जाने का सोभाग्य मिल रहा है , यह त्योहार आपसी भाईचारा ओर प्रेम का प्रतीक है ।
नीरू कालडां
नीर भरी बदली “खडुस “
आस्ट्रेलिया
