अंजलि,
GSKV RANHAULA, Delhi
एक दीप आशा का चमके, एक दीप विश्वास का,
एक दीप उजियारा भर दे धरती और आकाश का।
तम के गहन कुहासे में जो बिखरे दिव्य प्रकाश,
हर मुरझाए मन में भर दे नव जीवन उल्लास।
नेह-भरी बाती से महके सारा यह संसार,
दूर करे जो जन-मानस से अंधियारों का भार।
एक दीप भूखे की खातिर भोजन की थाली सा,
खिल जाए हर सूखा अधर महकती डाली सा।
एक दीप राजा के योजन, नीति और संकल्प का,
न्याय-धर्म की राह चले जो, हल हर एक विकल्प का।
शासन ऐसा हो जो समझें पीडा दीन-मलीन की,
रक्षा हो हर निर्बल की और आशा हो गमगीन की।
एक करुणा का दीप जले जो वीर शहीद के गर्व का,
मातृभूमि पर हँसकर मिटने के पावन उत्सर्ग का।
एक दीप हो प्रेम-प्रतीक, स्नेह, जीत और हर्ष का,
साक्षी बने धरा का हर कण नवयुग के उत्कर्ष का।
जलती रहे अखंड सदा ही यह मंगल-ज्योति पावन,
दीपांजलि के इस प्रकाश से महके जन-मन-आँगन।
