दीपावली: सिर्फ दीपों का नहीं, अंतस के उजास का पर्व

कार्तिक मास की अमावस्या का यह पावन पर्व दीपावली केवल एक साधारण त्योहार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे कई महान आध्यात्मिक प्रसंगों का एक पवित्र उत्सव है। जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को इसी पावन दीपावली की रात्रि में पावापुरी धाम में निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त हुआ था ।
दूसरी ओर, इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके लौटने की खुशी में आज भी अयोध्या में दीपावली बड़े धूमधाम से दीयों के साथ मनाई जाती है।
त्योहार हमारे जीवन में आने का मुख्य उद्देश्य यही है कि लोग खुश रहें और उनके भीतर की बुराइयाँ समाप्त हों। दीपावली का यह त्योहार हमारे घमंड, अभिमान और अहंकार को दूर भगाने तथा अपने अंदर विनम्रता और दयालुता का प्रकाश जगाने का संदेश देता है। हर साल लोग दीपावली पर घरों की साफ-सफाई करते हैं और रंग-बिरंगी लाइटिंग लगाते हैं, लेकिन जितनी जरूरी घर की सफाई है, उतनी ही जरूरी हमारे मन की सफाई और मन में उत्साह का रंग भरना भी है।
आजकल दीपावली पर चाइनीज़ लाइटों की मांग बढ़ती जा रही है, इसलिए हमें इस दीपावली पर पारंपरिक दीये ही खरीदने चाहिए, ताकि जरूरत मंद भी अपनी दीपावली हंसी-खुशी मना सकें।
यदि हम यह ठान लें, तो उनके चेहरों पर मुस्कान आएगी और वे भी दीपावली का आनंद ले सकेंगे। इतना सा संकल्प तो हम सब कर ही सकते हैं।


दिशा शाह कोलकाता पश्चिम बंगाल

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