दीप जले दीवाली
अमा की रात काली
जीवन में रहें हँसी ठिठोली
चेहरों पर खिले लाली
मिले दो हाथों को काम
नौजवाँ पाएं अपना मुकाम
बुजुर्ग रहें प्रसन्न और स्वस्थ
घर परिवार में रहें सुकून
वतन में हो अमन
खिले चहूँ ओर चमन
बहे बयार शांति की
ना हों बाते क्रांति की
अपनाए सब सदाचार
करे ना कोई व्यभिचार
रखें एक दूसरे से सरोकार
सुख दुख में रहें एक दूसरे के पैरोकार
ना टूटे कभी किसी का भरोसा
ना रूठें कभी कोई अपना
अमा की रात हो काली
दीप जले बन जाए दीवाली.
नरेश कुमार चौहान
