लो फिर
वही रौनक
लिए हुए
दीपावली आई।
फिर वही
स्मृतियाँ
ताज़ा हुईं,
मन की चौखट पर
खुशियाँ मुस्कुराईं।
पटाखों की
गूँज फिर
से लौटेगी,
मिठाइयों की
मिठास फिर
रिश्तों में
घुल जाएगी।
दीप जलेंगे,
घर-आँगन,
मंदिर और
मन भी
जगमगाएगा।
रंगोली के
रंगों संग
हर दहलीज़
सज जाएगी,
अपनों के
आने से
हर मुस्कान
खिल जाएगी।
बीते गिले-शिकवे
आज सभी
मिट जाएँ,
स्नेह और
विश्वास के
दीप फिर
जल जाएँ।
हर घर में
सुख-समृद्धि,
हर मन में
नई उमंग,
हर जीवन में
आशा का
उजियारा
सदैव बना रहे।
आइए,
इस दीपावली
केवल दीप ही नहीं,
प्रेम, करुणा,
सद्भाव और
मानवता का भी
प्रकाश फैलाएं
शुभ दीपावली!
सुनील कुमार श्रीवास्तव ठाणे मुम्बई से
