दीपों की माला से चमके घर आँगन का हर इक दर्पण…
इस बार सजावट हो ऐसी जीवन खुशियों से भर जाए…
लक्ष्मी गणेश के पूजन से महके जग का कोना-कोना…
चमकीली आतिशबाजी होअँधियारा सहमे डर जाए…
घर का, जग का और मन का हर कोना कोना हरसे
जिस रावण के वध की खातिर.श्री राम धरा पर आए थे…
आओ मिलकर सब दुआ करें इस बार वो रावण मर जाए…
कलयुग के ताने बाने में. उलझी सतयुगी कहानी का…
जो काम अधूरा है अब तक.वो काम दिवाली कर जाए…
झिलमिल रोशनी में निवेदित अविरल शुभकामनाएं
आस्था के आलोक में आदरयुक्त मंगल भावनाएँ
आलोक का ये त्योहार है ये पंच दिवसीय,
धनवंतरि जी के आशीर्वाद से और धन का प्रतीक धनतेरस
रूप को निखारती है रूप चौदस,
और फिर मुख्य पर्व दीवाली, पर्व है दीपों का, खुशियों का
आतिश बाज़ी का, स्वच्छता का, माँ लक्ष्मी की आराधना का
गोवर्धन पूजा प्रतीक है कृष्ण का, भारतीय खेती का
अन्न के सृजन का, खेतों की हरियाली, का और प्रक्रति का
और फिर समापन है इस पर्व का भाई दूज , यम् दिवतीया का
अनंत खुशियों, अनंत हर्षो उल्लास का, और संदेश है
परंपराओं के निर्वहन का, उनके पीढी दर पीढी हस्तांतरण का
आओ हम सब मिल कर खुशियों का पर्व दीवाली मनाएं
अनंत कुमार माथुर ’अनंत’
जयपुर राजस्थान
