एक अलग दीया

दीप जले हर घर आँगन में, खुशियों की बौछार हो।
हर चेहरे पर मुस्कान खिले, और प्रेम का विस्तार हो।।
अधर्म पाप के घने तिमिर को, मिलकर दूर भगाएँ हम।
नेह और सद्भाव के दीपक, हर हृदय में जलाएँ हम।।

मिटे निराशा मिटे वेदना, नव आशा का अंबार हो।
हर निर्धन की झोली में, माँ लक्ष्मी का भंडार हो।।
सिर्फ पटाखे और रोशनी नहीं, सादगी का भी मान हो।
प्रेम दया और धर्म से अपना, रोशन हिंदुस्तान हो।।

हर घर तक पहुँचे मिठाई, सुख शांति भी अपार हो।
धनी – गरीब का भेद मिटा कर, एक दूजे से प्यार हो।।
मिट जाए मन का अंधियारा, और भक्ति का संचार हो।
प्रभु की कृपा से सबका, जीवन भव सागर से पार हो।।

मन मंदिर में ज्योत जले, हरि नाम का उजास हो।
जन-जन में श्री राम बसे हर साँस में विश्वास हो।।
दीपोत्सव का पर्व मनाएँ, नवजीवन का उल्लास हो।।
हर घर दीपक खूब चमके, और पूर्ण सब की आस हो।।

मानवता और सत्कर्मों की ज्योति, हर हृदय में जलती रहे।
राम नाम की दिव्य रोशनी, युगों – युगों तक पलती रहे।।
दीप जले हर घर में पर, सैनिक सीमा पर रात बिताए।
देश के खातिर वह तो अपने, पर्व त्यौहार भूल जाए।।

अपने घर की दीपोत्सव को, त्याग देश के नाम।
उनके शौर्य से ही जगमग, भारत का हर धाम।।
उनके त्याग से ही रोशन, भारत का हर घर द्वार।
आओ उनके नाम जलाएँ, एक अलग दिया इस बार।।

मंजु बरनवाल, उखड़ा, पo बंo

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!