एक दीप देहरी पर, एक दीप अंतःकरण में…

दीप जलाना सरल बहुत है,पर स्वयं दीप बनना कठिन है,घर का तम तो मिट जाता है,मन का तम मिटना कठिन है। दीवारों से धूल हटाई,आँगन का हर कोना सँवारा,किंतु कभी…

उम्मीद का दीप

मिट्टी का चराग़ हूँ मैं,अभी उजाला मुझमें बाक़ी है,ज़माने के घने अँधेरों सेजंग निरंतर मेरी जारी है। फ़क़त मकानों की देहरी परदीपमालिका न सजाओ,दिल में जमी जो भावशून्यता है,उसे भी…

चलो,सफाई करते हैं

उन रुढ़िताओं की,जिन्होंनेघोंटा है गला,कई कई बार मानव जाति का। कहीं घुट रही स्त्री,बस स्त्री होने के कारण।कहीं घुट रहा लड़का,बस दलित होने के कारण।दलित नहीं, दमित कहोकिया गया है…

आया है दीपावली का त्योहार, लाया खुशियों का अनुपम उपहार। घर-आँगन सब महक उठे हैं, सज गए दीपों के ये कतार। तमसो मा ज्योतिर्गमय का संदेश सुनाता, यह पर्व हमें…

मोलभाव

​दीपावली की गोधूलि वेला। बाजार रंग-बिरंगी रोशनियों, खील-बताशों की महक और खरीदारों की चहल-पहल से गुलजार था। संध्या दोनों हाथों में खरीदारी के भारी-भरकम थैले थामे, हांफती हुई मुख्य सड़क…

एक दीप स्वीकार करो माँ…..

अगणित दीपों के प्रकाश में, एक दीप स्वीकार करो माँ, कर प्रकाश निज हृदयपटल पर,अंतर्मन के तिमिर मिटाएँमन के तम को करें पराजित, मानवता को गले लगाएँ ।मिथ्या, मृषा, अनृत…

एक दीप देहरी पर, एक दीप अंतःकरण में…

दीपावली एक दीप देहरी पर, एक दीप अंतःकरण में… दीप जलाना सरल बहुत है,पर स्वयं दीप बनना कठिन है,घर का तम तो मिट जाता है,मन का तम मिटना कठिन है।…

रंग बरसे गो

रंग बरसे कछु इमरत बरसे,से कछु इमरत बरसे,  बरस रही कस्तूरी रंग बरसे गो।। हरयो-हरयो गोबर से अंगना लिपायेंगे,  पीली-पीली मिट्टी मिलायेंगे।  रंग बरसे गो… छोटे-छोटे दीपक घर जोड़ेंगे, खूब ही खुशियां बांटेंगे।  नये-नये पकवान बनाएंगे, और मिठाई बनाएंगे।  रंग बरसे गो… नये-नये कपड़े पहिनेंगे, और लक्ष्मी पूजन करेंगे।  लक्ष्मी मां को आसन पे बिठायेंगे, और चुनरी उढ़ायेंगे।  रंग बरसे गो… लक्ष्मी मां को घर पर बुलायेंगे, और स्वागत करेंगे।  लक्ष्मी मां कृपा बरसायेगी, और आत्म दर्शन करेंगे।  रंग बरसे गो… रंग बरसे कछु इमरत बरसे, बरस रही कस्तूरी रंग बरसे गो।  तीनू ही रंग बरोबर बरसे, लाल, हरयो रंग पीलो रंग बरसे गो।। महिला अधिकारिता विभाग की साथिन सुगन देवी ग्राम पंचायत बबेली, पंचायत समिति रैणी, जिला अलवर (राजस्थान)। 🙏🏻🙏🏻

अनोखी दीपावली

नीता सेठ राधेनारायण की इकलौती बेटी थी। पिता ने बड़ी ही शानो- शौकत से एक राजकुमारी की भाँति अपनी पुत्री को बड़ा किया। नीता फूलों- सा कोमल जीवन जीने की…

जिंदगी का दीया बुझने से पहले…

डॉक्टर के शब्द रतन के कानों में अब भी गूँज रहे थे….“अब ज्यादा समय नहीं है… आपका हृदय बहुत कमजोर हो चुका है। सावधानी रखिए… शायद यह आपकी आखिरी दीपावली……”शब्द…

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