आया है दीपावली का त्योहार, लाया खुशियों का अनुपम उपहार।
घर-आँगन सब महक उठे हैं, सज गए दीपों के ये कतार।
तमसो मा ज्योतिर्गमय का संदेश सुनाता, यह पर्व हमें अंधकार से लड़ना सिखाता।
श्री राम के अवध आगमन की याद में, हर भारतीय का हृदय उमंग से भर जाता।
मिट्टी के दीये घर-घर जलते हैं, अमावस की रात को पूर्णिमा बदलते हैं।
लक्ष्मी-गणेश की होती है पावन पूजा, सबके दिलों में सद्भाव और प्रेम पलते हैं।
रंगोली की छटा बिखरती है प्यारी, सजती है पकवानों की थाली न्यारी।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक, सदा पावन रहे यह परंपरा हमारी।
नफरत मिटाकर गले सबको लगाना है, ज्ञान के प्रकाश से जग चमकाना है।
डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी
हिंदी विश्वविद्यालय (हावड़ा)
कोलकाता पश्चिम बंगाल
Mb. 9886638102
