दीए जलावो, उत्सव मनावो
आए हैं राजा राम हमारे
संग सिया के, दशानन हराके
चौदह वर्ष के बाद पधारे
आंखे हो रही हैं पागल
आंखें हो रही हैं पागल
देख के अद्भुत ये नजारे
दीए जलावो, उत्सव मनावो
आए हैं राजा राम हमारे
दशरथ के लाला अब नहीं जाना
हमें छोड़ कर तुम कहीं
जीवन ये हमने तुम पे वार दिया
जहाँ तुम रहोगे रहेंगे वहीं
अय्योध्या दुल्हन सी सजेगी
अय्योध्या दुल्हन सी सजेगी
लगेंगे मेले सरयू किनारे
दीए जलावो, उत्सव मनावो
आए हैं राजा राम हमारे
सब का हो मंगल सब रहें कुशल
मन में रहे यहीं भावना
खुशियों से ही सबका पड़े पाला
दुखों से नाहो कभी सामना
रौशनी इतनी कर दो की
रौशनी इतनी कर दो की
मिट जाएँ अंधकार सारे
दीए जलावो, उत्सव मनावो
आए हैं राजा राम हमारे
✍️कुमार निग्रन्थ
