डॉ उषाकिरण श्रीवास्तव पिता की ऊंगली नहीं मिलीफिर भी मैं चलना सीख लिया,मां मेरी ममता की मूरतप्यार में पलना सीख लिया। रात-रात भर जाग कर मां नेमुझको निश्चिंत सुला दिया,दुनिया…
प्यारी मां,सादर प्रणाम करती हूं,प्यारा सा ये खत, आपके नाम करती हूं।क्यों छोड़ कर चली गई मां ..तू इस संसार को,तरसते हैं हम बच्चे मां …तेरे प्यार को। आपके प्यार…
डॉ उषाकिरण श्रीवास्तव कड़कड़ाती ठंड से अपनेलाड़ले को बचाने के लिएमां के पाससिर्फ ममता थी,नहीं थे अपने बच्चों कोपहनाने के लिएनहीं थे जैकेट नहीं थे ब्रांडेड स्वेटरथर-थर कांपते बच्चों के…
रहि-रहि याद परे ले माई।दउरि- दउरि के कोरा लेके ओतना के दुलराई।। खिचड़ी में जब लाई बान्हे हमके देइ खियाई ।होली में त नवका कपड़ा हमके दे सिलवाई ।।पढ़त में…