
प्यारी मां,
सादर प्रणाम करती हूं,
प्यारा सा ये खत, आपके नाम करती हूं।
क्यों छोड़ कर चली गई मां ..तू इस संसार को,
तरसते हैं हम बच्चे मां …तेरे प्यार को।
आपके प्यार की वो शीतल छांव.. बहुत याद आती है,
आपकी दी हर सीख मेरे काम आती है..।
मां क्या.,तेरा कर्ज कभी हम चुका पाएंगे इस जन्म में,
सोच कर ये बातें …आंखें मेरी..नम हो जाती हैं…,।
बीत गया एक अरसा मां… देखे बिना तुझको,
तरस गई हैं ये आंखें… मां देखने को तुझको।
किस्मत वाले होते हैं वो..जिनकी मां पास होती है,
मां तो ईश्वर का दिया… अनमोल वरदान होती है।
बड़े सौभाग्य से हमें …मां का दर्शन ,प्रभु ने कराया हं,
फिर क्यों…. मां को अपने पास बुलाया है..।
तरस गए मां…हम तो तेरे प्यार को ..,
पाती लिखकर भेज रही… शीश झुका रही आपको।
आप जहां भी रहो .. आशीर्वाद देना हमें,
हम नादान बच्चे है.. मां माफ करना हमें ।
कोई एक दिन नहीं .. हम सदा तुम्हें याद करते हैं,
आज के दिन,… ये पाती हम तुम्हारे नाम करते हैं।
हर जन्म में ,मां तुमको ही हम चाहेंगे,
तुम ही मां बनना हमारी, ईश्वर को मनाएंगे।
तेरे हाथों से फिर हम, खाना खाएंगे।
तेरा प्यार और ममता की शीतल छांव ,हम पाएंगे।
रंजना बिनानी काव्या
