
डॉ उषाकिरण श्रीवास्तव
पिता की ऊंगली नहीं मिली
फिर भी मैं चलना सीख लिया,
मां मेरी ममता की मूरत
प्यार में पलना सीख लिया।
रात-रात भर जाग कर मां ने
मुझको निश्चिंत सुला दिया,
दुनिया के उलहन ताने को
आपने माथे लगा लिया।
अपनी संस्कृति क्या होती
मां ने हीं तो है ज्ञान दिया,
अपने पांव में कील चुभोकर
सीढ़ियां चढ़ना सीखा दिया।
रिश्ते-नाते को समझाकर
पढ़ा-लिखा कर बड़ा किया,
ईश्वर से उपर होती मां
प्रेम हृदय में जगा दिया।
मुजफ्फरपुर, बिहार
9334904712
