
माँ ने हर मोड़ पर हाथ थामे रखा,
गिरने से पहले ही मुझे संभाले रखा।
धूप बहुत आई जीवन की राहों में,
माँ ने अपने आँचल से उजाले रखा।
जब-जब मन टूटा, हिम्मत हार गई,
माँ ने मुस्काकर मेरी पीड़ा मार गई।
अपने दुख छुपाकर मुझको हँसना सिखाया,
सूनी राहों में भी चलने को कहा ।।
आज ये दूर हैं इस दुनिया की राहों से,
पर माँ की शिक्षा साथ हैं मेरी हर आहों से।
इनके जाने के बाद भी एहसास यही है,
माँ का आशीर्वाद अब भी मेरे पास यही है।
जब रात अकेली मुझको रुलाती है,
माँ की मीठी बातें याद आ जाती हैं।
लगता है जैसे सिर पर हाथ फिराती हैं,
चुपके से मेरी तकलीफ मिटाती हैं।
माँ, तुमने हर पल मेरा साथ निभाया,
जीवन जीने का सच्चा अर्थ बताया।
आज भी तेरी सीख सहारा बन जाती है,
तेरी याद मेरे को हर पल आती है ।।
सीमा मुकुंद अग्रवाल
