
शुक्रिया! तेरी उन उंगलियों का,
जिन्होंने मुझे चलना सिखाया।
शुक्रिया! तेरे दोनों सुन्दर हाथो का,
जिन्होंने मुझे इतना स्वादिष्ट खाना खिलाया।
शुक्रिया! तेरे कंधे का,
जिसमे रो कर मैंने मेंरा दिल हल्का किया।
शुक्रिया! तेरी गोदी का,
जिसमे तूने मुझे सुकून से सुलाया।
शुक्रिया! की तू मुझसे बात करती है,
जिससे मेरी सारी थकान मिट जाती है।
शुक्रिया! की तू मुस्कुराती है,
जिसे देख कर मुझे चैन की नींद आती है।
शुक्रिया! तेरी डाट का,
जिसने मुझे ना जाने कितनी सीख दी।
शुक्रिया! तेरी हौसलों भरी पंखो का,
जिसे मैंने इतनी लम्बी उड़ान भरी।
शुक्रिया! तेरी हिम्मत वाली बातों का,
जो तुझसे दुर रह कर भी मुझे हिम्मत दे जाती है।
शुक्रिया! तेरी दुआओं का,
जो इतनी दूर मुझे महफुस रखती है।
रचना:- सुधांशी पटेल
(बाल कवयित्री)
महावीर पार्क महासमुन्द (छग)
माता-श्रीमती सुनीता पटेल
9977264604
