खुशी भरा दीपोत्सव आया। मिलकर सबने आज मनाया।
रंग-बिरंगे कपड़े पहने। मिलते जुलते सबसे अपने॥
दिव्य अमावस रात सुहानी। सजी बहुत सुंदर ठकुरानी।
लक्ष्मी जी का पूजन करती। शीश चरण उनके है धरती॥
आज पटाखे बाल छुड़ाएँ। घर का मंदिर खूब सजाएँ ॥
दीप जलाकर तिमिर मिटाएँ। हर्षित हो सब मंगल गाएँ ॥
घर आँगन है खूब सजाया। तोरण सुंदर द्वार लगाया।
रंगोली भी खूब बनाई। बड़े प्रेम से उसे सजाई॥
खील-बताशे बनी मिठाई। गीत बधावा मिल सब गाई।
भोग लगाया लक्ष्मी माता। रात्रि किए सब ही जगराता॥
कच्ची मिट्टी दीप जलाये । रौनक पूरे घर में छाये।
खूब पटाखे मिलकर फोड़े। मन के रिश्ते अद्भुत जोड़े॥
क्लेश-द्वेष को आज जलाओ। सच मन से गुण ईश्वर गाओ।
लक्ष्मी फिर घर में है आती। सुख समृद्धि वैभव वो लाती॥
नमन करें सब लक्ष्मी मैया। पार लगाएँ वो ही नैया।
सुख संपत्ति भरे जीवन में, खुशियाँ छाती फिर तन-मन में॥
हेमा जालान’कनक’ मुंगेर
