दीप जलाओ, मन जगाओ, बदलो अपना अंदाज,
Gen Z की नई दिवाली – सीखो इंसानियत का राज!
आ गई दिवाली, गाइस! स्क्रीन हुई है ब्राइट,
स्टेटस पे है दीया, और घर में डार्क नाइट!
रील बनाओ, पोस्ट लगाओ, लाइक्स की भरमार,
पर दिल के अंधेरों का कौन करेगा उपचार?
ओ युवा! जरा सुन ले, ये पैगाम निराला है,
दीपों का त्योहार नहीं, ये खुद को बदलने वाला है!
ना लाइक्स का नशा रहे, ना झूठा अभिमान,
ना नफरत की आग रहे, ना ऊँच-नीच की शान।
खुद भी चमको, जग भी चमके, इतना रख विचार,
अंधकार से लड़ने का नाम ही है ये उजालों का त्यौहार!
दीपावली सिर्फ मेल-मिलाप और चमक-दमक का मेला नहीं,
यह तो अपनों के संग हंसने-बोलने का है झमेला सही।
स्क्रीन से नजरें हटाकर, जरा अपनों को गले लगाओ,
पटाखों से ज्यादा दिलों में, प्यार का उजाला फैलाओ।
आओ मिलकर कसम ये खाएँ, बदलेंगे इस बार,
दिल में प्रेम, हाथों में कर्म, रखें ये विचार!
दीप जलाओ, मन जगाओ, बदलो अपना अंदाज,
Gen Z की नई दीवाली – सीखो इंसानियत का राज!
डॉ. श्वेता चौधरी “संजीवनी”
इंदौर (मप्र)
