दीवाली

नित्याकला एस नायर दीपों का उजाला लेकर दीवाली आई,तम के आँगन में आशा मुस्काई।झिलमिल-झिलमिल दीपों की माला सजीजैसे नभ में तारों की बारात सजी। रंग-बिरंगे रंगोली, द्वार सजे हैं,कुमकुम-रोली से…

दिवाली का दिया

मैं दिवाली का दिया हूँ,सुनो मेरी कहानी।मिट्टी से हूँ मैं बना हुआ,है कितनी प्यारी मेरी ज़िंदगानी। कुम्हार ने मुझको प्यार से गढ़ा,अपने हाथों से सुंदर रूप दिया।छोटे-छोटे, प्यारे-प्यारे,दीपों की कतार…

आओ हम दिवाली मनाएं

आओ हम सब मिलकर मनाएँ दिवाली का त्योहार, तम का अंधियारा दूर करें, जलाएँ दीप अपार। जगमग कर दें घर-आँगन, हो समृद्धि की बौछार, सुखमय हो सबका जीवन, महके द्वार-द्वार।। इसी दिवस पूर्ण हुआ था श्रीराम का वनवास, सीता-राम और लखन पधारे अपने निवास। झिलमिल दीप जलाकर लोगों ने पर्व बनाया खास, तब से चली आ रही परंपरा कार्तिक मास।। इस अमावस्या की रात्रि को करते प्रकाशवान, संध्या समय लक्ष्मी पूजन का है विशेष विधान। वंदन करते श्री गणेश और कुबेर भगवान, तत्पश्चात प्रसाद बाँटते परिवार और मेहमान।। भारत का सबसे प्रमुख यह आनंदमय त्योहार, रंगों से रंगोली बनाकर सजाते घर-द्वार। स्नेह रूपी तेल से जलते दीपों की कतार, परदेसी भी घर आते मिलने अपने परिवार।। रसोईघर में बनते इस दिन ढेरों पकवान, मीठे-नमकीन व्यंजनों से खिल उठती मुस्कान। बाजारों से खरीदकर लाते वस्त्र और सामान, चमचमाती झालर लगाकर सजाते घर-दुकान।। सैनिक कवि –  गणपत लाल उदय, अजमेर राजस्थान

आज दीपावली है

आज दीपावली है चलो घर-घर दिया जलाएं, जहां अंधेरा हो रोशनी वही दिखाएं, चलो घर-घर दिया जलाएं, जीवन में आप जिनकी मदद कर सकते हैं…. चुपचाप बिना किसी को बताएं…

शुभ दीपावली|| आई दीवाली, आई दीवाली

दीपों की माला से चमके घर आँगन का हर इक दर्पण…इस बार सजावट हो ऐसी जीवन खुशियों से भर जाए…लक्ष्मी गणेश के पूजन से महके जग का कोना-कोना… चमकीली आतिशबाजी…

दीप ज्योति दिवाली

लंका दहन कर श्री राम जी आए ,अधर्म पर धर्म विजय कराए।श्रीराम संग सीता जी लाए,संग में लक्ष्मण-हनुमान भी आए।द्वार-द्वार पर दीप जले,सबके घर रोशन हुये।चारों ओर खुशियाँ है छाई,जनक…

एक दीप अपने भीतर भी

इस दीपावली घर की सफ़ाई करते हुए,कुछ पुरानी यादें भी हाथ लगीं।कहीं बचपन की हँसी छिपी थी,कहीं अपनों की अधूरी बातें मिलीं।दीवारों से धूल तो हटा दी,पर मन की कुछ…

स्वयंभू

त्रिनेत्र धारी शीश पर, हैं गंग को धारण किये ।कंठाहार सर्प का, हैं गरल को पिये हुये।।स्वयंभू अस्तित्व का,पार कौन पा सका।भूत प्रेत साथ में,भस्मी तन मले हुये।। भूत प्रेत…

“एक दीप ऐसा भी जलाएँ”

आज दीपों का पर्व मनाएँ,हर आँगन में दीप जलाएँ।लेकिन इस बार दिवाली पर,एक नया संकल्प भी उठाएँ।मिट्टी के दीपक की लौ से,अंधियारे को दूर भगाएँ।नफरत की दीवारें तोड़ें,प्रेम के कुछ…

दीपोत्सव आया है: तन मन का अँधेरा पहले मिटाओ

इस वर्ष की दीपावली आ गई है,तन मन का अँधेरा पहले मिटाओ,बाहर तो दीप हजारों जलते हैं,भीतर का दीपक पहले जलाओ। घर आँगन को तो सजाते हो सब,मन के आँगन…

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