एक दीप मानवता के नाम

किशोर वेनार्जी एक दीप जलाओ मानवता के नाम परअन्धियारे मे उजाला लाओ करुना के नाम पर.नफरत कि आन्धिओ को वुझने न दोप्रेम कि दिया हर दिल मे जलाओ. जात पात…

दीप सोच की

चलो जलाते हैं एक दीप,उस सहजता के नाम पर,देखकर मुझे कोई लड़कीडरेगी नहीं ,सहज होगी मुझसे।खुलकर कह सकेगी बात ,नहीं करना होगा आंदोलनउसे आत्मरक्षा के नाम पर।चलो जलाते हैं एक…

महावीर निर्वाण उत्सव : दीपावली का आध्यात्मिक पक्ष

दीपावली को हम धन और श्रीराम के अयोध्या लौटने से जोड़कर देखते हैं, परंतु जैन परंपरा में इस पर्व का अर्थ अधिक गहरा है। जैन मान्यता के अनुसार कार्तिक अमावस्या…

ये है दिवाली

ये है दिवाली जी,ये है दिवाली।छायी है चारों तरफ़ खुशहाली।ये है दिवाली जी, ये है दिवाली।।सजी है अयोध्या, बहुत ही सुहावन।नगर घाट लगते हैं, बहुत खूब पावन।लगी दीप की पंक्ति,…

दीपावली

आओ खुशियों के दीप जलाएं, अंधेरे को मिटाएं। देखो आई दीवाली। जगमग जलते दीपों से मिटे , ये रात अमावस वाली। देखो आई दीवाली। धनतेरस से शुरू पर्व यह, खुशियां दे जाए हर एक को। सुख समृद्धि आए,  पूरे हो सपने जो अनेक हों। वाणी से स्नेह सुधा छलकाए,ऐसी हो पूजा की थाली।   देखो आई दीवाली…! जगमग जलते दीपों से मिटे , ये रात अमावस वाली। देखो आई दीवाली। अपना समाज ऐसा,पिछड़ा है अशिक्षा के विकार से।  उनको हम प्रेरित करें,  उन्नत बनाएं हर प्रकार से। उनको हम शिक्षित,सबल बनाएं, हरें अज्ञान की कालिख  काली।  देखो आई दीवाली…. जगमग जलते दीपों से मिटे , ये रात अमावस वाली। देखो आई दीवाली। दीवाली होगी सबकी रोशन, जब उम्मीदों के दीप जगमगाएंगे। आशाओं के दिए जलेंगे , जब खुशियों को बाटेंगे, बटाएँगे। लक्ष्मी गणेश की पूजा यही है, सबके घर में हो खुशहाली। देखो आई दीवाली….। जगमग जलते दीपों से मिटे , ये रात अमावस वाली। देखो आई दीवाली। भैयादूज स्नेह उत्सव है भाई बहन के अनुपम  प्यार को। करके गोवर्धन पूजा,सीखें कान्हा के शिक्षा व्यवहार को। जिम्मेदारी के पर्वत से बोझ को, हंसकर के उठाते गिरधारी।  देखो आई दीवाली….। जगमग जलते दीपों से मिटे , ये रात अमावस वाली। देखो आई दीवाली। ….✍🏾 बृजमोहन पाल । ग्राम ककरही खुर्द पोस्ट सदलपुरा जनपद चंदौली,उत्तर प्रदेश।

दीपोत्सव

सुखदेव शर्मा एडवोकेट कवि जिला बदायूं / संस्कार न्यूज़ शरद ऋतु कार्तिक मास अमावस की ठंडी रात काली।अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाती दिवाली।।युगों युगों से मिट्टी के दीप…

अनाथालय एवं वृद्धाश्रम की दिवाली

जब दीप जले सब के घर में, यह हाल अनाथ जनों मन में।तज के जननी-पितु को सब ही, सुत मोद मनावत हैं घर में। सब लोग हँसे घर मोद रचे,…

दीप जलाकर दूर भगाएँ

मंगल-पावन दीवाली का मिलजुलकर त्योहार मनाएँ । बाहर -भीतर अन्धकार को,दीप जलाकर दूर भगाएँ ।। स्नेह-भाव का तेल डालकर, हर कुटिया को रोशन कर दें । ऐसे मधुरिम बाणी बोले, सबके मन की पीड़ा हर दें । अपनों-सा व्यवहार करें सब, खुशियों के उपवन खिल जाएँ। बाहर -भीतर अन्धकार को, दीप जलाकर दूर भगाएँ ।। प्रेम-भाव से अन्न खिलाकर,प्यास- क्षुधा सबकी जो हर दें । निर्धन-दुखियों की सेवा कर, जन मन को आनंदित कर दें  । जाति-पाँति के भेद छोड़कर, बाँहों में भर  कंठ लगाएँ । बाहर -भीतर अन्धकार को, दीप जलाकर दूर भगाएँ ।। सब पाएँ  साम्राज्य सुखों का होते आविष्कार जहाँ हैं । फिर कब हो पथ में अंधेरा कर प्रकाश विज्ञान वहाँ हैं । देश मुक्त हो तब दुष्टों से, वीर शस्त्र से देह  सजाएँ । बाहर -भीतर अन्धकार को, दीप जलाकर दूर भगाएँ ।। उन्हें मिले आरोग्य कि जो नभ, स्थल जल से भय दूर कराते। जीव मात्र के प्रति करुणा हो,  साथ चलें सब प्यार निभाते। तन-मन से संपन्न सुखी हो ,ईर्ष्या का सब क्लेश मिटाएँ। बाहर -भीतर अन्धकार को,दीप जलाकर दूर भगाएँ ।। डॉ भावना सावलिया आर्ट्स कॉलेज मोडासा जिला-अरवल्ली  उत्तर गुजरात Mo no. 8849842456 Email : savaliabhavna501@gmail.com

दीपोत्सव 

दिवाली आने वाली है। अपने संग खुशियाँ लाने वाली है। गन्दगी को दूर भगाकर, स्वच्छता का वातावरण बनाकर। मां लक्ष्मी और गणेश का प्रतिमा  लाकर, देव पूजन करेंगे, नववस्ञ पहनकर। दीप जलाएं,दीप जलाएं। अँधेरा को दूर भगाएं।। जगमग जगमग दीप जलेंगे। घर आँगन सब खूब सजेंगे।। मिटेगा दिल का सब अंधियारा, चमकेगा अपना देश प्यारा। नए कपड़े सब पहनेंगे। घर घर मिठाई बटेंगे। घर आँगन में सुन्दर रंगोली बनेंगे। जगह जगह पर दीप जगमग जलेंगे। एक दूजे से गले मिलेंगे।अपना आशीष सबसे लेंगे। प्रेम का दीप जले सब दिल में,ममता की गंगा  बह जाए। द्वेष ,अहंकार, ईर्ष्या भूल भाईचारा जग में  छा जाए।  हर्ष नारायण दास  फारबिसगंज, अररिया,बिहार 854318

शुभ दीपावली

कार्तिक माह के मध्य मे , दीपावली त्यौहार | रंग रोगन घर- घर करै. ज्योति जरै हर द्वार ||  दीवाली के दिन बसे,  काली अमावस के रात | जगमग ज्योती प्रीयती, करि किरपा के बरसात || हरी भरी वसुन्धरा , लहराती अन्नपूर्णा | हेमंत ऋतु कनकाम्बरा, तिमिरनिशा दीपाम्बरा || श्री लछ्मी धन दायिनी, जगपालक जगदंब |  सिन्धू  सूता गजवाहिनी , आऔ माता अविलंब || सबके बसे भंडार मे, बिन तैरे सब रंक | भूमी, पदवी, वाहन , विजय , बसे श्री विष्णू कै अंक || कमला माता महाविद्या , वैष्णवी कमलासना |  देवी पद्मा अन्नपूर्णा , कमलहस्ते कमलानना || शंखं चक्रं गदा पद्मं  ,   धारणीम्   चतुर्भूजं | रक्ताम्बरा  प्रसन्नमुद्रं,  देहि सुखं च ऊर्जंम् ||  आरती पूजा दीप मंडली , श्री फल कदली भोग | पान सुपाणी मै खुस होकर, शुभ करती संयोग ||  प्रो. हिरन दास महार 

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