एक अलग दीया

दीप जले हर घर आँगन में, खुशियों की बौछार हो।हर चेहरे पर मुस्कान खिले, और प्रेम का विस्तार हो।।अधर्म पाप के घने तिमिर को, मिलकर दूर भगाएँ हम।नेह और सद्भाव…

एक दीप अंतर्मन में भी

इस दीपोत्सव, एक दीप अंतर्मन में भी अवश्य जलाना होगा!एक दीप अंतर्मन में भी अवश्य जलाना होगा!आज दीपोत्सव आया है, कुछ प्रश्न उठाना अभी बाकी है; केवल घर-आँगन को ही…

दीपावली है दीये ही जलाना

बिजली की झालर से मत घर सजानादीपावली है दीये ही जलाना माटी के दीपक जो है बनातामुश्किल से है वो घर को चलाताअक्सर पड़े यूँही रह जाते वोसारे कभी भी…

दीपावली — प्रकाश, प्रेम और विजय का महापर्व

दीपों की जगमगाती रोशनी, आँगन की मधुर मुस्कान, दीपावली केवल पर्व नहीं, यह भारत की संस्कृति की पहचान। चौदह वर्षों का वनवास पूर्ण कर, जब श्रीराम अयोध्या आए थे, माता…

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

दीप की ये पंक्ति कतारहर रही धरा का अंधकार।ज्योति की लौ पुंज से जबजगमगायेगी ये वसुधा।चीर सीना अंधकार काफैल जायेगा उजाला। फिर न होगी इस धरा परकाली घटा की अभिशप्त…

दीपों का त्योहार : आओ संकल्पकरें हम!

(युवा शक्ति के सामाजिक एवं राष्ट्रीय दायित्व का प्रेरणा-गीत) दीपों का त्योहार साथियो, आओ आज मनाएँ हम,अज्ञान-अंधकार मिटाके, ज्ञान-ज्योति फैलाएँ हम। ईर्ष्या-द्वेष मिटे मन से, प्रेम-सद्भाव जगाएँ हम,नफरत की दीवारें…

एक ऐसा दीप जलाओ….

दीपोत्सव हेतु गीत ताल -कहरवाबोल – एक ऐसा दीप जलाओ….रचनाकार – युवा कवि आनन्द प्रकाश एक पिता के सब बेटे हैं, ऐसा भाव जगाओ..।एक ऐसा दीप जलाओनफ़रत का तिमिर मिटाओ…

एक दिवाली

क्षीर नीर से परी पूर्ण, यह अवनी अविनाशी हैविश्वपूजित धरा धाम जो, उज्जैनी और काशी है,सत्य, शक्ति की गंध यहाँ, बालक बालक योद्धा है,भारत का हर गाँव रामायण, हर घर…

दीपावली के दोहे

01दीपक से बाती कहे, मत करना अभिमान।जलने का ही अर्थ है, देना नया विहान॥ 02अँधियारे की उम्र क्या, दीप जले जब एक।सदियों की चुप्पी मिटे, सत्य अकेला नेक॥ 03माटी ने…

एक दीप पर्यावरण के नाम

प्रकृति, एकता और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक भावपूर्ण कविता एक दीप पर्यावरण के नाम — प्रकृति की रक्षा का संकल्प आओ मिलकर दीप जलाएँ, धरती का हर कोना महकाएँ।  न हो केवल रोशनी घर-आँगन में, एक दीप प्रकृति के नाम जलाएँ। हरी-भरी वसुंधरा की सुंदरता, हम सबकी साँसों का आधार है।  नदियाँ, पर्वत, वन और उपवन, प्रकृति का अनमोल उपहार हैं। क्यों काटें हम वृक्षों की छाया, क्यों नदियों को मैला बनाएँ?  जिस धरती ने जीवन दिया है, उसका ऋण मिलकर क्यों न चुकाएँ? एकता की शक्ति को पहचानें, हर मन में संरक्षण की अलख जगाएँ।  एक हाथ में हो सेवा का संकल्प, दूजे हाथ से पौधे लगाएँ। न जाति का भेद, न भाषा की दीवार, पर्यावरण रक्षा हो सबका विचार।  जब जन-जन मिलकर कदम बढ़ाएगा, तभी स्वच्छ और सुंदर कल आएगा। नन्हे पौधों को वृक्ष बनाएँ, जल की हर बूँद को बचाएँ।  प्लास्टिक मुक्त हो अपना संसार, स्वच्छ हवा से महके हर द्वार। दीपों का पर्व हमें यह सिखलाए, अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए।  आओ इस दीपावली एक प्रण उठाएँ, धरती माँ का ऋण निभाएँ। एक दीप हो हरियाली के नाम, एक दीप हो स्वच्छता के नाम।  एक दीप हो जल और जीवन के नाम, एक दीप हो प्रकृति के सम्मान के नाम। क्योंकि पर्यावरण की रक्षा केवल किसी एक की जिम्मेदारी नहीं, यह हम सबका साझा कर्तव्य है। आओ, एकता का दीप जलाएँ, मिलकर अपनी धरती को स्वर्ग बनाएँ। 🌱🪔 ✍️डॉ. श्याम नंदन प्रसाद, पीएच. डी. (प्लांट इकोलॉजी) पूर्व प्राचार्य & पर्यावरणविद्

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