दीप जलाएँ, मन के अँधियारे मिटाएँ

प्रो. स्मिता शंकर सृजना, बैंगलोरदीपों की पावन बेला आई,खुशियों ने फिर ली अंगड़ाई।आँगन-आँगन दीप जलें,हर चेहरे पर मुस्कान खिलें। मिट्टी का दीप यही सिखाता,खुद जलकर भी रोशनी फैलाता।क्यों न हम…

दीपावली पर घर आए श्रीराम

अब मंदिर बन गया है, श्रीराम का श्रीराम का।अब आगे नम्बर है,घनश्याम का घनश्यामका।। लाखों दीप जलाकर दीवाली,मना रहे हैं लोग।दर्शन कर श्रीराम सिया का, लगा रहे हैं भोग।।सिया राम…

” दीपावली “

दीपावली का त्यौहार है आया ,खुशियों की सौगात है लाया ,अँधेरा दूर भगाया है ,हर घर में उजाला छाया है। झिलमिल करती है हर गली,लगती है जैसे दुल्हन सजी।रंगोली से…

आई दिवाली आई दिवाली

आई दिवाली आई दिवाली,खुशियांँ जीवन में लाई दिवाली।दीप जले तो दिल भी रोशन,प्यार अपनापन लाई दिवाली। भाई बहन और चाचा-चाची, मां-पापा और दादा-दादी।दोस्त रिश्तेदारों के संग, हंँसी खुशी से मनायें…

 आखिर किस बात की दिवाली “

आखिर किस बात की दिवाली “ जब असूंअन बहके सूख चुकें,आंखों में गहरी लाली हैं,होंठों की सिलवटें टूट रही हैं,ढांचा दिखलाती कंगाली हैं,कीचड़ में डूबे काले रंगों में ही,दिखती सुनहरी…

दीपावली के दिये..

जगमग करते दिये जलाओ आजदीपावली के दिये जलाओ आज छोटी सी ज़िंदगी को खूबसूरत बनाओखुशियों से भर दो हर कोना कोना देखो क़ोई भी घर न छूटने पाएश्री राम के…

दीपावली – सिर्फ दीपों का नहीं, अंतस के उजास का पर्व

✍🏻 राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि”पत्रकार दीपावली सिर्फ दीपों का नहीं,अंतस के उजास का पर्व है,बाहर की रोशनी से ज्यादा,भीतर के प्रकाश का पर्व है।एक दीप ऐसा जलाएं,जो अहंकार को…

अंधकार से प्रकाश तक…

घना तिमिर था, एक लौ काँपी थी, मौन के भीतर, इक प्रार्थना जागी थी। सब कुछ बिखरा था, आशा रूठी सी थी, उसी टूटन से, किरण फूटी सी थी। राहें उलझी थीं, कदम डगमगाए थे, अधूरे सपने, नयनों में समाए थे। भय भरा हृदय था, नयन भर आए थे, फिर भी भीतर से, स्वर बोला – चले चलें। करुणा का तेल बना, श्रद्धा की बाती बनी, जली जो लौ, तो भ्रम की रात ढली। एक छोटे दीये से, दिशा बदल चली, अंधियारे ने मानी हार, उजाले की घड़ी चली। अब मैं देह नहीं, मैं एक भाव हूँ, न मैं रात हूँ, मैं ही प्रभात हूँ। जिधर भी जाऊँ, वहीं प्रकाश हूँ, अंधकार से निकल कर, मैं खुद ही प्रकाश हूँ। ये लौ बुझे नहीं, यही प्रार्थना मेरी है, हर बहन, हर साथी तक पहुँचे, यही कामना मेरी है। हम जो कर्म छोड़ जाएँ, वही राह बने सबकी, आने वाली पीढ़ी के लिए, नींव बने ये लौ सबकी। -डॉ माया एस एच

दीपावली का उजियारा

आया दीपावली का पावन, पर्व बड़ा सुखकारी है।चमक उठी हर एक अटरिया, खुशियों की फुलवारी है॥तम का सारा भेद मिटाने, ज्योति लिए हम आए हैं।घर-घर दीप जलाकर प्यारे, खुशियाँ खूब…

अनोखी दीपों के साथ भारत की दिवाली

जब कार्तिक की शाम ढलती है,जब मिट्टी की खुशबू हवा में घुलती है,तब भारत का हर बच्चा कहता है —आ गई, हमारी अनोखी दिवाली आ गई। पर इस बार हम…

error: Content is protected !!