खुशियों की दिवाली

चलो सखी चलो हमारी दिवाली को,कुछ उद्देश्य पूर्ण और अलग बनाएँ।हर गरीब के घर को भी रोशनी दे जाएँ।। चलो सखी चलो दिवाली पर,कुछ महत्वपूर्ण कार्य निपटाऍं।प्रकृति को स्वच्छ कर…

जले ऐसा दीप, राम की मर्यादा हो हमारा

मन पर हो जीत तो रोज समझो दिवाली हैप्रेम का दिया जले, हृदय का तम खाली हैअप्प दीपो भव को सार्थक बनाना जरूरीदीपोत्सव पर्व में रंगोली तो रंग निराली है…

दीपक

दीपक सा जलते रहना तुम, रौशन तो जग को करना है।संयम धारण ज्ञान सिखा यह, अंतस के तम से लड़ना है।।सुंदर जीवन राह खिले तब, संबल ताकत को भरना है।मुश्किल…

नास्तिक लड़की की दीवाली

दीप जले हर आँगन में, मेरा आँगन फिर सूना है, हर घर से मिठाई आई, मेरे हिस्से बस दूना है। जो हाथ मिलाते हैं सबसे, मुझसे आँख चुरा लेते, मेरे होने से ही जैसे, अपनी दीवाली बचा लेते। मैंने कभी किसी के देवता का अपमान नहीं किया, हर धर्म की माँ को अपनी माँ सा माना, फिर क्यों ये सिला? मैंने पूछा – “एक दीया मेरे हाथ से भी जल जाए,” वो हँसे और कहा – “नास्तिक को दीया सजाने का क्या हक़?” वो घूमते हैं, हँसते हैं, पकवान बाँटते हैं आपस में, मैं दूर खड़ी देखती हूँ – कोई नहीं पूछता, “चल ना साथ में।“ मैंने कह दिया था – “मैं भी पैसे दूँगी, दीवाली साथ मनाएँगे,” पर उन्होंने सुना भी नहीं – जैसे मैं इस दुनिया में ही नहीं आई। मेरा दीया जलाने का मन करता है, रंगोली सजाने का, माँ की तरह मिठाई बनाने का, दीवाली को अपनाने का। पर हर दरवाज़ा बंद है, हर बुलावा बस रस्म है, जैसे मेरा होना ही, उनके उत्सव से अलग है। मैं ईश्वर से नहीं, इंसानों से डरती हूँ अब हर पल, हर बार सोचती हूँ – क्या मेरी गलती बस यही है कि मैं इंसान हूँ? मैंने धर्म नहीं, इंसानियत को अपना ईश्वर माना है, क्या यही मेरी गलती है… क्या यही मेरी सज़ा है? NABAM YAMI (Noona) , ITANAGAR   Ganga, Itanagar, State: Arunachal Pradesh

जगमग दीप जले

(आस्था, प्रेम, सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं का आलोक-पर्व) आँगन-आँगन ज्योति खिले, जगमग दीप जले, मन के सूने कोने में, नव उल्लास पले। तम की सारी बेड़ियाँ, उजियारे से टूटें, सोए हुए अरमानों के, फिर से सपने फूटें।। माटी के नन्हे दीपों में, जीवन का संदेश, जलकर भी जो बाँटते हैं, उजियारे का परिवेश। स्वार्थ मिटे, सद्भाव जगे, प्रेम की धारा बहे, मानवता के पावन पथ पर, हर मन निर्भय रहे।। किसी द्वार पर भूख न ठहरे, किसी नयन में नीर, हर निर्धन के जीवन में भी, उतरे सुख की पीर। सूनी आँखों में आशा का, एक सितारा दमके, टूटे मन के आँगन में फिर, विश्वास का दीप चमके।। रूठे रिश्ते जुड़ जाएँ, मिट जाए मन का द्वेष, प्रेम-सुधा से सिंचित हो, धरती का परिवेश। घृणा-दंभ के दुर्ग ढहें, करुणा का विस्तार हो, हर मानव के हृदय में, मानवता का सत्कार हो।। आओ मिलकर दीप जलाएँ, मन का तम हरने को, निज सुख की सीमा लाँघें, परहित में कुछ करने को। एक दिया विश्वास का हो, एक प्रेम के नाम जले, जब तक साँस शेष है अपनी, जगमग दीप जले।।   रचनाकार -संजय कुमार हिरवानी “हीरा  “जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़

एक दीप देहरी पर, एक दीप अंतःकरण में…

दीप जलाना सरल बहुत है,पर स्वयं दीप बनना कठिन है,घर का तम तो मिट जाता है,मन का तम मिटना कठिन है। दीवारों से धूल हटाई,आँगन का हर कोना सँवारा,किंतु कभी…

उम्मीद का दीप

मिट्टी का चराग़ हूँ मैं,अभी उजाला मुझमें बाक़ी है,ज़माने के घने अँधेरों सेजंग निरंतर मेरी जारी है। फ़क़त मकानों की देहरी परदीपमालिका न सजाओ,दिल में जमी जो भावशून्यता है,उसे भी…

चलो,सफाई करते हैं

उन रुढ़िताओं की,जिन्होंनेघोंटा है गला,कई कई बार मानव जाति का। कहीं घुट रही स्त्री,बस स्त्री होने के कारण।कहीं घुट रहा लड़का,बस दलित होने के कारण।दलित नहीं, दमित कहोकिया गया है…

आया है दीपावली का त्योहार, लाया खुशियों का अनुपम उपहार। घर-आँगन सब महक उठे हैं, सज गए दीपों के ये कतार। तमसो मा ज्योतिर्गमय का संदेश सुनाता, यह पर्व हमें…

मोलभाव

​दीपावली की गोधूलि वेला। बाजार रंग-बिरंगी रोशनियों, खील-बताशों की महक और खरीदारों की चहल-पहल से गुलजार था। संध्या दोनों हाथों में खरीदारी के भारी-भरकम थैले थामे, हांफती हुई मुख्य सड़क…

error: Content is protected !!