दीप जले हर घर आँगन में, खुशियों की बौछार हो।हर चेहरे पर मुस्कान खिले, और प्रेम का विस्तार हो।।अधर्म पाप के घने तिमिर को, मिलकर दूर भगाएँ हम।नेह और सद्भाव…
इस दीपोत्सव, एक दीप अंतर्मन में भी अवश्य जलाना होगा!एक दीप अंतर्मन में भी अवश्य जलाना होगा!आज दीपोत्सव आया है, कुछ प्रश्न उठाना अभी बाकी है; केवल घर-आँगन को ही…
प्रस्तावना : दीपोत्सव भारतीय संस्कृति का बहुआयामी पर्व है, जिसमें प्रकाश केवल भौतिक उजास ही नहीं, बल्कि ज्ञान, न्याय, करुणा और सामूहिक चेतना का अद्भुत प्रतीक है। इसकी विविध परंपराएँ…
दीपों की जगमगाती रोशनी, आँगन की मधुर मुस्कान, दीपावली केवल पर्व नहीं, यह भारत की संस्कृति की पहचान। चौदह वर्षों का वनवास पूर्ण कर, जब श्रीराम अयोध्या आए थे, माता…
दीप की ये पंक्ति कतारहर रही धरा का अंधकार।ज्योति की लौ पुंज से जबजगमगायेगी ये वसुधा।चीर सीना अंधकार काफैल जायेगा उजाला। फिर न होगी इस धरा परकाली घटा की अभिशप्त…
(युवा शक्ति के सामाजिक एवं राष्ट्रीय दायित्व का प्रेरणा-गीत) दीपों का त्योहार साथियो, आओ आज मनाएँ हम,अज्ञान-अंधकार मिटाके, ज्ञान-ज्योति फैलाएँ हम। ईर्ष्या-द्वेष मिटे मन से, प्रेम-सद्भाव जगाएँ हम,नफरत की दीवारें…
दीपोत्सव हेतु गीत ताल -कहरवाबोल – एक ऐसा दीप जलाओ….रचनाकार – युवा कवि आनन्द प्रकाश एक पिता के सब बेटे हैं, ऐसा भाव जगाओ..।एक ऐसा दीप जलाओनफ़रत का तिमिर मिटाओ…
क्षीर नीर से परी पूर्ण, यह अवनी अविनाशी हैविश्वपूजित धरा धाम जो, उज्जैनी और काशी है,सत्य, शक्ति की गंध यहाँ, बालक बालक योद्धा है,भारत का हर गाँव रामायण, हर घर…
01दीपक से बाती कहे, मत करना अभिमान।जलने का ही अर्थ है, देना नया विहान॥ 02अँधियारे की उम्र क्या, दीप जले जब एक।सदियों की चुप्पी मिटे, सत्य अकेला नेक॥ 03माटी ने…