
भूमंडल पर अनुपम कृति।
ईश्वर प्रदत्त है मां।
न कोई जगत में है न कोई होगा मां जैसा।
ममता, दुलार,लाडका खजाना।
कनखियों से मुझे निहारना।
मेरी गलतियों को मुस्कराते सुधारना।
कभी प्यार से कभी डांट से समझाना।
है ये मेरी लाडली मां का अनोखा रूप।
बड़ी ही सुगमता से सुलझाती हर समस्या।
पिता की अकाल मृत्यु ने।
खोखला कर दिया था जीवन।
पर
मां की सहनशीलता, कर्मठता ने
सुगमता से पार किया वो समय।
मेहनत मां की रंग लाई।
बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाई।
उत्साह हर कदम पर सदा बढ़ाती रही।
उच्च शिक्षा प्राप्त बच्चे अच्छे पदों पर रहे।
मां की मुस्कान में दिखाई देता त्याग।
वात्सल्य की मूर्ति मां
मां का सानी कोई ना दूजा।
मंजु रत्न भार्गव
