माँ जब संग हो

माँ जब संग हो तो ये जीवन, जीना है आसान।
बिन माँ के ये जीवन भी, लगता है शमशान।।

तेरी याद आए अम्मा तो,आँख से आँसू बहते हैं।
माँ के चरणों में ही, जन्नत के दर्शन होते हैं।।

जब तक न खाए बेटा, तब तक माँ न खाती है।
मिले जो माँ का आँचल तो,गहरी निद्रा आती है।।

माँ बिन ये दुनिया अब हमको, लगती है वीरान।
माँ जब संग हो तो, ये जीवन जीना है आसान।।

ऊँच-नीच और भेद-भाव,ये न करना सिखलाती है।
माँ अपने बच्चों को हमेशा,नेक राह दिखलाती है।।

नेक राह पर चलकर माँ,मैं खुशहाली लाऊँगा।
मुझसे दूर न होना माँ, वरना मैं मर जाऊँगा।।

बड़ों का नित मैं मान रखूँ, करूँ न अब अपमान।
माँ जब संग हो तो, जीवन जीना है आसान।।

             ✍️...गौतम कुमार कुशवाहा
                          मुंगेर ( बिहार )

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