खोज लाती थी माँ

माँ की,
सूक्ष्म दृष्टि,
उघाड़ लाती थी,
मेरे मन में,
छिपी चिंता को,
और कहती थी माँ,
तू बता या ना बता,
मैं जानती हूँ,
तू चिंता में है।
मैं माँ हूँ ना!
पूछती थी माँ,
चिंता का कारण।
टाल देता था मैं,
पर माँ कहाँ टलती थी।
जानकर ही रहती थी,
चिंता का कारण।
खोज लाती थी माँ,
चिंता को,
विदा करने की युक्ति।

—- डाॅ० तेजिंद्र —-
” प्रस्तुत कविता ‘ खोज लाती थी माँ “- मेरी मौलिक,अप्रकाशित एवं अप्रसारित कविता है।विश्व मातृ दिवस पर आप द्वारा प्रकाशित किये जा रहे गद्य-पद्य संकलन में सम्मिलित होने हेतु आपकी सेवा में प्रस्तुत है।”
डाॅ० तेजिंद्र

डाॅ० तेजिंद्र सुपुत्र श्री जगदीश राम,मकान नम्बर 882,सेक्टर 19 भाग दो,हुडा कैथल (हरियाणा) पिन : 136027
मोबाइल नम्बर : 9416658454

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!