
जीवन देती है सदा,भर देती है प्राण।
माँ ऐसी संजीवनी, देती दुख से त्राण।।
¶ बूँद पिलाती दूध की,भरती है उत्साह।
दौड़ी आती है सदा,मुख से निकले आह।।
माँ सद्गुण भरती यहाँ, बनकर गुरु, भगवान।
माँ ऐसी संजीवनी, देती दुख से त्राण।।
¶ माँ से जीवन पूर्ण है,माँ उजियारी राह।
माँ पूरी करती सदा, बच्चे की हर चाह।।
अनुशासन में बाँधकर,करे सतत निर्माण।
माँ ऐसी संजीवनी, देती दुख से त्राण।।
¶ ममता की छाया मिले,गोदी है सुख सेज।
कैसे सीमा पर वही, देती है यों भेज।।
जन्मभूमि हित में चुने, कठिन राह निर्वाण।
माँ ऐसी संजीवनी,देती दुख से त्राण।।
¶ माँ से जीवन बँध गया, सुख-दुख का संसार।
प्रभुजी ने भेजा सुनो, अनुपम यह उपहार।।
माँ काली, माँ अम्बिका,माँ में वेद पुराण।
माँ ऐसी संजीवनी, देती दुख से त्राण।।
¶ सिर पर माँ का हाथ हो, चरणधूलि हो माथ।
नहीं सताए कालिमा,माँ जब आए साथ।।
संकट आने पर खड़ी ,माँ बनकर चट्टान।
माँ ऐसी संजीवनी, देती दुख से त्राण।।
विनीता निर्झर
