मां का आंचल


मां के आंचल से बढ़कर, दुनिया में जन्नत क्या होगी।
माता के आंचल से बढ़कर, दुनिया में शोहरत क्या होगी।।
1/सारे सुखों की खान है माता,
सारी खुशियों की जान है मां।
करुणामयी और दयामयी,
सारे गुणों की शान है मां।।
माता की नित पूजा करें हम,
इससे बड़ी इबादत क्या होगी।
माता के आंचल से ————।।
2/अंतर्मन में ध्यान है मां का,
और हृदय में बास है।
मां के पैरों में नतमस्तक,
ईश्वर मेरे पास है।।
मां के आशीषों से बढ़कर,
जग में दौलत क्या होगी।
माता के आंचल से———–।।
3/मां का ख्याल रखें हरदम,
चाहे निकले मेरा दम।
मां तो ममता प्यार लुटाती,
दूर करें बच्चों का गम।।
मां का हाथ रहे सर पर तो,
विश्व की ताकत क्या होगी।
मां के आंचल बढ़कर——–।।
4/माता के बिन घर भी सूना,
सूना रहता हर आंगन।
माता के बिन हर बच्चे का,
खाली रहता है दामन।।
मंजुल मां के प्यार से बढ़कर,
दूज़ी अमानत क्या होगी।
मां के आंचल से —————||

मनोज मंजुल

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